शिव खेड़ा विश्व के उन प्रभावशाली प्रेरक प्रवक्ताओं में से एक है, जिन्होंने हजारों लोगों की जिंदगी अपने व्यावहारिक बुद्धि और गहरे विश्वास से बदलने में मदद की हैं। उन्होंने लोगों को अपने नजरिए को दोबारा देखने के लिए प्रेरित किया हैं।
शिव खेड़ा द्वारा लिखे गया मोटिवेशन कहानीमेसे यह एक कहानी है ।
जरूरी नहीं है कि शिक्षित व्यक्ति सही फ़ैसला करे EDUCATION DOSE NOT MEAN GOOD JUDGEMENT
एक आदमी सड़क के किनारे सोमोसे बेचा करता था। शिक्षित न होने के कारण वह अख़बार नहीं पढ़ता था। ऊँचा सुनने के वजह से रेडियो नहीं सुनता था, और आंखे कोमजुर होने के वजह से उसने कभी टेलीबिजॉन नही देखा था। इसके बावजूद वह काफी समुसे बेच लेता था। उसकी बिक्री और नोफ़े में लगातर कौस्टोमर ज्यादा होती गई। उसने और ज्यादा आलू खरीदना शुरू किया, साथ ही पाहले वाले चुल्हे से बड़ा उत्कृष्ट चूल्हा खरीद करle आया। उसका ब्यापार लागातर बढ़ रहा था, तभी हाल ही में कॉलेज से बी.ए. (B.A.) की डीग्री हासिल कर चुका उसका बेटा पिता का हाथ बटाने के लिए चला आया .
उसके बाद एक उजिबोगोरिब घटना घटी। बेटे ने उस आदमीसे पूसा, " पिताजी क्या आपको मालूम है की हमलोग एक बड़ी मंदी का शिकार बनने वाले है ?" पिता ने जवाब दिया, "नहीँ, लेकिन मुझे उसके बारे में बाताओ। " बेटे ने कहा - " अन्तार्राष्ट्रीय पारिष्थितिया बड़ी गोम्भीर है। घरेलू हालात तो और भी बुरे है। हमे आने वाले बुरे हालात का सामना करने के लिए तैयार हो जाना चाहिए।" उस आदमी ने सोचा की उसका बेटा कॉलेज जा चुका है, आखबार पढ़ता है, और तो रेडियो सुनता है, इसलिए उसकी राय को होलके ढंग नही लेना चहिये। दूसरे दिन से उसने आलू के खरीदkom कर दी, और अपना साइनबोर्ड( signboard) नीचे उतार दिया। उसका जोश खत्म हो चुका था। जल्दी ही उसी दुकान पर आने वालो की तादाद घटने लगी और उसकी बिक्री तेजी से गिरने लगी। पिता ने अपने बेटे से कहा, " तुम सही कह रोहे थे। हमलोग मंदी के दौर से गुजर रोहे है। मुझे ख़ुशी है की तुमने वक्त से पहले ही सचेत कर दिया।"इस कहानी से हमें क्या सिख मिलती है ? इससे ये नतिजे निकलते है -
1. हम अपनी सोचke मुताबिक, खुद को आत्मोसन्तुष्ट करने वाली वोविषयवानिया कोर देते है।
2. कोई बार होम बुद्दिमत्ता को अच्छा फैसला मानने की गलती भी कोर बैठते है।
3. एक इंसान ज्यादा बुध्दिमान होने के बावजूद गलत फ़ैसला कर सकता है।
4. अपने सलाहकार सावधानी से चुनिए,लेकिन अमल अपने ही फ़ैसले पर करिए।
5. अगर किसी इंसान में आगे दी हुई पांच खूबियाँ हो, तो वह स्कूली शिक्षा हासिल किए बिना क़ामयाब हो सकता है -
* चरित्रों (character)
* प्रोतिबोध्दता (commitment)
* दृर बिश्वास (conviction)
* तोहजीब (courtesy)
* साहस (courage)
6. कई लोग ज्यादा ज्ञानी है। उन्हें चलता-फिरता विश्वकुश माना जा सकता है, पर दुःख की बात है कि इसके बावजूद वे नाकामयाबी की जीती-जागती मिसाल होते है।
समझदारी का मतलब किसी हुनर को तेज़ी से सीखना है। हुनर एक योग्योता है। क्षमता में यग्यता, और सीखे गोई हुनर को अमल में लाने की इच्छा, ये दोनों बाते शामिल होती है। इच्छा वह नजरिया है जो किसी हुनरमंद इंसान को क्षमतावान बनाता है। बहुत से लोग हुनरमंद तो होते है लेकिन समोरथयोवान नही होते क्योंकि सही नजरिए के बिना काबिलीयत व्यर्थ जाती है।
- विंस्टन चर्चितयूनीवर्सिटी की पहली जिम्मेदारी ज्ञान देना और चरीत्र निर्माण होता है, न कि व्यपारिक और तकनीकी शिक्षा देना।

